सोशल मीडिया को इस्तेमाल करते वक्त फुद्दू मत बनिए, बार बार मीडिया के जरिए तमाम एक्सपर्ट्स ये समझाते हैं, फिर भी खुद को विद्वान समझने वाले तमाम लिखाड़ बिना खबर का तथ्य पुष्ट किए ही, उस खबर को शेयर कर लेते हैं। बाबा रामदेव की कोरोना की दवा कोरोनिल के मामले में भी ऐसा ही हुआ है, 2 खबरें इस बारे में बड़ी तेजी से वायरल हो रही हैं, दोनों खबरों की सच्चाई आज जान लीजिए।

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पता नहीं पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ का ये असली ट्विटर एकाउंट है या नहीं, लेकिन ये खबर बिलकुल भी असली नहीं है और सैकड़ों लोग इसे शेयर कर रहे हैं, बिना तथ्य जांचे। इस तरह की कोई खबर नहीं है। ना तो कोरोनिल पर अभी रोक लगी है, केवल प्रचार पर रोक लगी है, कुछ कागजात और ट्रायल रिपोर्ट आदि पतंजलि से मांगे गए थे, अब सरकार जांच कर रही है, और ना ही किसी अधिकारी ने पतंजिल पर एक्शन लिया था। इस नाम के किसी अधिकारी के आयुष मंत्रालय में होने की भी सूचना नहीं है।

खुद आयुष मंत्री इस पूरे मामले पर मीडिया से बात कर रहे हैं, सो किसी अधिकारी का कोई रोल उनकी बिना मर्जी के हो ही नहीं सकता। इस मामले में किसी भी अधिकारी के हटाने की भी कोई सूचना नहीं है। सो इस खबर पर ना यकीन करें और ना ही शेयर करें। हालांकि फिर भी आप आयुष मंत्रालय की वेबसाइट पर जाकर चैक कर सकते हैं कि इस नाम का कोई अधिकारी वहां है कि नहीं- https://main.ayush.gov.in/about-us/whos-who

वैसे केन्द्र सरकार की मीडिया विंग पीआईबी की फैक्ट चैक विंग ने भी इस खबर को फर्जी करार दिया है

अब बात करते हैं उस दूसरी खबर की जो बाबा रामदेव की दवा कोरोनिल के बारे में लोग शेयर कर रहे हैं। जो खबर वो शेयर कर रहे हैं, उसमें दावा कर रहे हैं कि आयुष मंत्रालय ने बाबा रामदेव की दवाई कोरोनिल को हरी झंडी दिखा दी है। दरअसल इसके पीछे थी बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण की ये ट्वीट

पता नहीं आचार्य बालकृष्ण ने कैसे ये मान लिया है कि विवाद की पूर्णाहुति हो गई है। हालांकि शायद वो ये कहना चाहते होंगे कि हमने अपना काम कर दिया है, सरकार ने जो भी डॉक्यूमेंट्स या रिपोर्ट्स मांगी थीं, वो हमने दे दी हैं और उनको ये पूरा विश्वास है कि आयुष मंत्रालय अब अपना ग्रीन सिग्नल कोरोनिल को दे ही देगा। लेकिन टेक्नीकली रूप से आयुष मंत्रालय ने अभी तक कोरोनिल को हरी झंडी नहीं दी है।

अगर आप गौर से आचार्य बालकृष्ण ने जो डॉक्यूमेंट शेयर किया है, उसको पढ़ेंगे तो पाएंगे कि ये सिर्फ पावती या Acknowledgement है कि आयुष मंत्रालय को पतंजिल की तरफ से वो सारे डॉक्यूमेंट्स और रिपोर्ट्स मिल गए हैं, जो उनसे मांगे गए थे। यानी अब गेंद आयुष मंत्रालय के पाले में हैं। वो उन डॉक्यूमेंट्स की जांच करेंगे, क्योंकि पूरी दुनियां की नजर इस दवाई पर है, विपक्ष औऱ मीडिया की भी, तो वो कुछ और डिटेल भी मांग सकते हैं, और हो सकता है कि वो दोबारा सरकारी डॉक्टर्स या ICMR के निर्देशन में ट्रायल करवाने को कहें। सो ऐसे में जब तक आयुष मंत्रालय वाकई में हरी झंडी नहीं दिखा देता, ये कहना और लिखना गलत है कि बाबा रामदेव की दवाई कोरोनिल को सरकार ने पास कर दिया है।