NBCC यानी नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी, केन्द्र सरकार की वो कंपनी जो आजकल इस वजह से चर्चाओं में हैं, क्योंकि उसे बार बार सुप्रीम कोर्ट याद कर रहा है। हाल ही में नोएडा और ग्रेटर नोएडा आम्रपाली बिल्डर के अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करवाने का काम सुप्रीम कोर्ट ने एनबीसीसी को ही सौंपा है। एनबीसीसी उन्हें खुद नहीं बनाएगी, बल्कि बाकी कांट्रेक्टर्स को काम देगी और उसकी ये कंसल्टेंसी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होगी। लेकिन बार बार एनबीसीसी के अधिकारी आम्रपाली के इतने प्रोजेक्ट्स जिनमें 40 हजार से ज्यादा घर खरीदार फंसे हुए हैं, को लेकर चिंतित थे। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने एनबीसीसी को अभय दान देकर उन सभी अधिकारियों को चिंता मुक्त कर दिया।

Reality check: Does NBCC have the funds to complete stuck real estate  projects? - Moneycontrol.com

सुप्रीम कोर्ट ने आम्रपाली केस में सुनवाई करते हुए आदेश दिया कि एनबीसीसी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आम्रपाली के अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करवा रही है, कल को किसी भी कोर्ट या ट्रिब्यूनल में एनबीसीसी या उनके अधिकारियों के खिलाफ कोई भी पार्टी केस फाइल नहीं कर सकेगी। चाहे वो होम बायर्स हों, कॉन्ट्रेक्टर्स हों, नोएडा अथॉरिटी जैसी कोई सरकारी संस्था या फिर बैंकों जैसी फाइनेंशियल संस्था, इस मामले में कोई भी एनबीसीसी को नहीं घसीटा जा सकता। यानी एक तरह का अभयदान है, सुरक्षा कवच है, जो सुप्रीम कोर्ट ने एनबीसीसी के अधिकारियों को दिया है, जिसके चलते वो अब वो बिना हिचके या डरे इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में मदद कर सकते हैं। कोर्ट ने ये भी साफ किया कोई भी सरकारी कमीशन, कमेटी या अथॉरिटी भी एनबीसीसी से पूछताछ नहीं कर सकती है, ना बुला सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने एक और मुश्किल से एनबीसीसी को मुक्ति इस सुनवाई में दिलवा दी, वो ये कि कोई भी होम बायर अब एनबीसीसी से प्रोजेक्ट की प्रोग्रेस रिपोर्ट या किसी भी तरह के सवाल नहीं पूछ सकता। एनबीसीसी किसी का भी जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है। एनबीसीसी अपनी सारी प्रोग्रेस रिपोर्ट कोर्ट रिसीवर को देगी और होम बायर्स उसे वेबसाइट पर अपडेट करेंगे। होम बायर्स अपनी समस्या कोर्ट द्वारा नियुक्त रिसीवर को बता सकते हैं।

Amrapali Builder

इस फैसले के बाद उम्मीद है कि एनबीसीसी के सारे डर खत्म हो जाएंगे, उनको लग रहा था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के चलते घर बनाने से लेकर होम बायर्स की शिकायतों को सुनने तक सब उनके गले पड़ गया है, दूसरे उनको य़े भी लगता था कि चूंकि प्रोजेक्ट शुरू से बिल्डर बना रहा था, सो कल को कोई बड़ी दिक्कत आती है, तो उनको कोर्ट में घसीटा जा सकता है। ऐसे में उन्हें एक इम्युनिटी कवर चाहिए था, जो आज टॉप कोर्ट ने उन्हें दे भी दिया।