20 सैनिकों की शहादत चीन के साथ हिंसक झड़प में गलवान वैली में हो गई, चीन ने भी अपने कम से कम 35 (अमेरिकी गुप्तचर एजेंसी के मुताबिक) या फिर 43 (भारतीय इंटरसेप्ट जानकारी के मुताबिक) सैनिकों को खोया है। लेकिन वो ना अपने सैनिकों की शहादत बताता है और ना ही भारत की तरह उनको इस तरह अंतिम विदाई देता है।

ये हमारा देश है, जिसको अपनी शहीदों पर कोई शर्म नहीं आती, वो देश की खातिर मरे हैं, उनको राजकीय सम्मान के साथ तिरंगे में लपेटकर अंतिम विदाई देना उनका हक है, इस देश के लिए उन्होंने जान दी है। चीन की तरह अपने सैनिकों के नाम जाहिर करने पर हमें गर्व ही होता है, ये पूरे 20 शहीदों के नाम, उनके जिले का नाम

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आप देख सकते हैं कि देश के कौने कौने से, आपके बीच के लड़के चीन के खिलाफ गलवान वैली में आप सबके लिए मोर्चा खोले पड़े थे और वक्त आया तो अपनी कुर्बानी देने पर भी नहीं हिचके। चाहे बिहार हो, यूपी हो, हिमाचल हो, तेलंगाना हो, झारखंड, पश्चिम बंगाल, एमपी या फिर पंजाब, ऐसा लग रहा है हर राज्य ने अपना बेटा इस देश को बचाने के लिए बलिदान कर दिया है

लेकिन चीन अपने सैनिकों को अंतिम विदाई भी नहीं देता और ना उनके नाम ही बताता। ऐसे में ये हिंसक झड़प चीन को भी भारी पड़ी है, जंग लड़ने की उसकी भी हिम्मत नहीं है। आगे से वो बंदर घुड़की देने से भी बचेगा। दोनों विदेश मंत्रियों ने बात की है और सहमति जताई है कि आगे अब कुछ भी गलत नहीं होगा। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ बताया है कि कैसे चीन ने 6 जून को सीनियर कमांडर्स के बीच हुआ समझौता तोड़ा और वापस लौटने से पहले गलवान घाटी में एक स्ट्रक्चर बनाने की कोशिश की और विरोध करने पर ये हिंसक झड़प हो गई।