जम्मू कश्मीर पुलिस का ये डीएसपी उस वक्त चर्चा में आ गया था, जब वो 2 आतंकियों को अपनी गाड़ी में घाटी से सुरक्षित जम्मू पहुंचाने की कोशिश कर रहा था। आतंकी दोनों ही बड़े कुख्यात थे, केवल कश्मीर में ही नहीं पूरे देश में इस बात से लोग चौंके थे कि कोई डीएसपी की बड़ी पोस्ट पर रहते हुए कैसे आतंकियों की इतनी मदद कर सकता है, वो भी सिख होकर। लेकिन अब उससे भी ज्यादा चौंके जब ये खबर आई कि देवेन्द्र सिंह को इसलिए कोर्ट से जमानत मिल गई क्योंकि पुलिस 90 दिन के तय समय में चार्जशीट फाइल ही नहीं कर पाई।

लेकिन क्या वाकई देवेन्द्र सिंह जेल से बाहर आ जाएगा? वो व्यक्ति जो वर्दी में होकर अब तक घाटी के आतंकियों की मदद करता रहा, रंगे हाथों पकड़ा गया, वो इतनी आसानी से छूट जाएगा? आखिर पुलिस ने उसके खिलाफ समय से चार्जशीट दाखिल ना करके उसकी इतनी मदद क्यों की? तमाम सवाल थे, जिनको ना केवल जनता पूछ रही है बल्कि विपक्षी नेता भी और बिना राजनीतिक पार्टी के भी विपक्ष का काम कर रहे अनुराग कश्यप जैसे फिल्मकार भी

अनुराग कश्यप सुबह से 20 ट्वीट देवेन्द्र सिंह पर कर चुके हैं या उससे जुड़ी खबरें रिट्वीट कर चुके हैं। साथ में अपने गैंग यानी स्वरा भास्कर, हंसल मेहता आदि की इस मुद्दे पर ट्वीट भी। लेकिन सरकार ने इन लोगों को इस लायक समझा ही नहीं कि जवाब दे। सरकार ने जवाब दिया शशि थरूर को, क्योंकि वो भी यही मुद्दा उठा रहे थे। सरकार की एंटी टैरर एजेंसी नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी यानी एनआईए ने शशि थरूर को जवाब दिया

इस जवाब से आपके इस जमानत की हकीकत समझ आएगी, दरअसल दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कुछ कॉल इंटरसेप्ट की थीं, जिनमें डी गैंग की दिल्ली में बम विस्फोट की योजना थी। इन्हीं कॉल्स में देवेन्द्र सिंह के नाम का भी जिक्र हुआ था, दिल्ली पुलिस को शक था कि देवेन्द्र सिंह भी इस योजना में शामिल हो सकता है। दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और जम्मू की हीरानगर जेल में कैद देवेन्द्र सिंह को रिमांड पर दिल्ली लेकर आई थी।

हालांकि माना जा रहा है कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को उस मामले में भी ज्यादा पुख्ता सुबूत नहीं मिल पाए हैं क्योंकि उसके बाद दिल्ली दंगे हो गए और फिर बाद में कोरोना के चलते लॉकडाउन हो गया। सो दिल्ली पुलिस उस मामले में तय समय सीमा यानी 90 दिन के अंदर चार्जशीट फाइल नहीं कर पाई, सो देवेन्द्र सिंह के वकील ने इस बिना पर जमानत याचिका दायर कर दी तो कोर्ट को जमानत देनी पड़ गई।

लेकिन इस केस का कश्मीर के आतकियों वाले केस से कोई लेना देना नहीं है, देवेन्द्र सिंह के उस केस की जांच तो एनआईए कर ही रही है और एनआईए ने कहा है कि वो उस केस की चार्जशीट जुलाई के पहले हफ्ते में कोर्ट में दाखिल कर देगी। ऐसे में ना तो देवेन्द्र सिंह बाहर निकल पाएगा और ना ही उसे टैरर केस में जमानत ही मिल पाएगी। सो समझ लीजिए उसे जमानत केवल दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के केस में मिली है, लेकिन वो जेल के अंदर ही रहेगा और एनआईए की चार्जशीट से ही पता चल पाएगा कि उसका जुर्म कितना बड़ा है और तब कोर्ट तय करेगा कि उसको जमानत दी जाए या सजा या बरी किया जाए।