ये केवल कश्मीर के मुसलमानों को उमर अब्दुल्ला का मैसेज नहीं है बल्कि अप्रत्यक्ष रुप से देश भर के मुसलमानों को है। उमर अब्दुल्ला के मिजाज में ये तब्दीली वाकई में चौंकाने वाली है। जब से बाहर आए हैं, 370 को हटाने को लेकर कोई आंदोलन सोचने के बजाय वो लगातार खुद को भारत के प्रति झुका हुआ दिखा रहे हैं। जब गोवा के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने ये ट्वीट किया कि उमर और महबूबा पाकिस्तान के डर से स्थानीय चुनावों को करवाने के खिलाफ थे, तो उमर ने उन्हें झूठा तक कह डाला था। अब ये लगातार दूसरा बड़ा वाकया है

उमर अब्दुल्ला की इस ट्वीट को बार बार और ध्यान से पढ़िए, कोई मीडिया इस तरह का आरोप कश्मीरियों पर लगाती और खासतौर पर मुस्लिमों पर तो बवाल हो जाता, लेकिन अब उनका नेता ही ये आरोप लगा रहा है कि कैसे कई कश्मीरी मुसलमान चीन और भारत के बीच गम्भीर तनाव की बीच, उस समय जबकि हमारे इतने सैनिक शहीद हो चुके हैं, चीन के समर्थन में ट्वीट कैम्पेन चला रहे हैं। इसलिए वो उन्हें चेतावनी जारी कर रहे हैं।

सबसे दिलचस्प बात है कि ये कश्मीर में ही नहीं पूरे भारत में इस तरह का ट्रेंड है, आप चीन से तनाव के बीच मोदी विरोध के ट्वीट्स को छांटेंगे तो बहुत से मुसलमान होंगे। मोदी और बीजेपी से अपनी नाराजगी के चक्कर में दुश्मन चीन को भी समर्थन करने से चूकते नहीं तमाम लोग। ऐसे में चूंकि धारा 370 को हटाने से पहले कश्मीरियों को ये अघोषित छूट मिली हुई थी कि वो देश के खिलाफ कुछ भी कहकर बच जाते थे, उमर अब्दुल्ला को बखूबी पता है कि अब इसकी सजा भी मिल सकती है। इसलिए उन्होंने सलाह दी कि कि पहले चीन में उइगर मुसलमानों की दुर्दशा गूगल कर लें, फिर चीन को सपोर्ट की सोचें।

हाल ही में आई वॉयस ऑफ अमेरिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक नॉर्वे के उइगर हैल्प संगठन ने बताया है कि 2016 से अब तक 518 उइगर धार्मिक नेताओं और इमामों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें से कई की तो हिरासत कैम्पों में ही मौत हो गई। सबसे ज्यादा ये अत्याचार मुसलमानों पर चीन के शिनजियांग प्रांत में हो रहा है। ऐसे में उमर अब्दुल्ला इन घटनाओं के बहाने एक तरह से कश्मीरी मुसलमानों को भारत प्रेम का पाठ पढा रहे हैं, उम्मीद है कि इस मौके पर चीन को जाने अनजाने में सपोर्ट कर रहे बाकी देश के लोग भी सबक लेंगे।