नई दिल्ली: फ्रांस से भारत आने वाले 36 राफेल विमान की पहली खेप यानी पांच विमान आज भारत आ रहे हैं. दोपहर दो बजे तक पांचों विमान अंबाला बेस कैंप पर लैंड करेंगे. राफेल विमान को लेकर एक और खास बात सामने आ रही है और वो ये कि इसे उड़ाने वाले पहले भारतीय कोई और नहीं बल्कि हिलाल अहमद हैं जो कश्मीर से ताल्लुख रखते हैं.

वही कश्मीर जो भारत की आन-बान और शान है. वही कश्मीर जहां कुछ लोग नौजवानों को भड़काकर गलत रास्ते पर ले जाते हैं, उसी जमीं से निकले हिलाल अहमद राफेल उड़ाने वाले पहले भारतीय पायलट हैं. हिलाल अहमद ने राफेल लड़ाकू विमानों की पहली खेप को विदाई दी जो फ्रांस से भारत के लिए सोमवार को उड़ान भरी. इतना ही नहीं हिलाल भारतीय जरूरतों के अनुसार, राफेल विमान के शस्त्रीकरण से भी जुड़े रहे हैं.

दुनिया के सर्वश्रेष्ठ फ्लाइंग ऑफिसर हिलाल अहमद अभी फ्रांस में भारत के एयर अटैच हैं. भारतीय वायुसेना अधिकारी हिलाल अहमद दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में एक मध्यम वर्गीय परिवार से आते हैं. हिलाल के पिता दिवंगत मोहम्मद अब्दुल्लाह राथर जम्मू-कश्मीर के पुलिस विभाग से पुलिस उपाधीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे. हिलाल की तीन बहने हैं और वो इकलौते भाई हैं. हिलाल अहमद राथर की पढ़ाई जम्मू जिले के नगरोटा कस्बे में सैनिक स्कूल में हुई. हिलाल 17 दिसंबर, 1988 को लड़ाकू पायलट के रूप में भारतीय वायुसेना में शामिल हुए. 1993 में उन्हें फ्लाइट लेफ्टिनेंट बनाया गया और फिर साल 2004 में विंग कमांडर बने. हिलाल साल 2016 में ग्रुप कैप्टन और 2019 में एयर कोमोडोर बने.

हिलाल ने डिफेंस सर्विसिस स्टाफ कॉलेज से अपना ग्रेजुएशन किया और फिर अमेरिका के एयर वार कॉलेज से भी डिस्टिंक्शन के साथ डिग्री हासिल की है. हिलाल अहमद ने एलडीए में स्वार्ड ऑफ ऑनर जीता है. अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन और देश सेवा में उनके योगदान के लिए हिलाल को वायुसेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है.

अधिकारी हिलाल ने डिफेंस सर्विसिस स्टाफ कॉलेज (डीएसएससी) से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। उन्होंने एयर वार कॉलेज (अमेरिका) से भी डिस्टिंक्शन के साथ डिग्री हासिल की है औरर उन्होंने एलडीए में स्वार्ड ऑफ ऑनर जीता है। उनके देश सेवा में बेहतर योगदान को देखते हुए हिलाल को वायुसेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल मिल चुका है.