हिंदुजा भाई दुनियां भर के सबसे अमीर व्यक्तियों में गिने जाते हैं। 4 भाइयों पर 11.3 बिलियन डॉलर की सम्पत्ति है। अभी तक उन सभी की सम्पत्ति एक ही खाते में गिनी जाती है- हिंदुजा ब्रदर्स के नाम पर। उनको पता है कि जैसे भी वो अलग अलग करेंगे, उनकी गिनती टॉप के अमीरों की सूची में काफी नीचे चली जाएगी, परिवार का रुतबा कम हो जाएगा। ऐसे में 2014 में सभी भाइयों ने मिलकर एक डॉक्यूमेंट पर हस्ताक्षर किए, जिसमें लिखा था कि , ” The assets held by one brother belong to all, and that each man will appoint the others as their executors”।

यानी एक की सम्पत्ति सभी की है, और एक व्यक्ति उसके लिए दूसरे को कार्यकारी के दौर पर नियुक्त कर सकता है। भाइयों ने मिलकर अलग अलग धंधों, अलग अलग देशों में जाकर ये अपनी जड़ें जमाईं और पूरी दुनियां ने उनकी ताकत और एकता का लोहा मानकर उन्हें हिंदुजा ब्रदर्स के रूप में मान्यता भी दी। लेकिन अब ये परम्परा टूटने के कगार पर है और वजह बनी है अगली पीढ़ी। सबसे बड़े भाई श्रीचंद आहूजा, जो 84 साल के हो चुके हैं, उनकी बेटी वीनू ने चारों भाइयों के बीच साइन किए इस डॉक्यूमेंट को कोर्ट में चुनौती दी है और कहा है कि इसे रद्द किया जाए।

हालांकि बाकी 3 भाई गोपीचंद, प्रकाश और अशोक हिंदुजा ने साफ किया है कि बड़े भाई की जगह उनकी बेटी इस समझौते में आ सकती है, उनके पास जो सम्पत्ति है वो तो उनकी रहेगी ही, ऐसे में डॉक्यूमेंट को रद्द करने का कोई औचित्य नहीं बनता है, लेकिन वीनू चाहती है कि वो रद्द हो। जिस हिंदुजा बैंक को लेकर वीनू का सवाल है, उसको लेकर भी तीनों भाइयों ने कहा कि बैंक की पूरी शेयर होल्डिंग वीनू के नाम करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उनकी कोशिश है कि फैमिली वैल्यूज और प्रतिष्ठा बनी रहनी चाहिए।

हालांकि कोर्ट ने ये बात भी नोटिस में ली है कि कैसे श्रीचंद आहूजा ने अपनी बेटी और वकील को उनकी तरफ से निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया है। इधर बाकी तीन भाई कोरोना के चलते इंडसइंड बैंक के शेयर 70 फीसदी गिरने से परेशान हैं और वो शेयर होल्डिंग बढाने की जद्दोजहद में लगे थे।