जो लोग चीन को समझते हैं, वो जानते हैं कि चीन अक्सर अपनी बात को कहने के लिए अपनी सरकारी मीडिया का इस्तेमाल करता है। जिस सरकारी मीडिया का सबसे बड़ा अखबार ग्लोबल टाइम्स चीन में मरे हुए सैनिकों की संख्या बताने को तैयार नहीं है, चीनी सामान के बॉयकॉट से परेशान हो चला है। उसने भारत को चीन के अलावा पाकिस्तान और नेपाल के भी बॉर्डर फ्रंट खोलने की साफ धमकी दी है। ग्लोबल टाइम्स में छपी खबर सीधे सीधे चीनी सरकार का इशारा होती है।

इस पूरी खबर में बताया गया है कि कैसे पाकिस्तान चीन का सामरिक दोस्त है, यानी जंग में साथ देने वाला, दूसरा बॉर्डर फ्रंट भारत के खिलाफ वहां से खुलेगा और तीसरा बॉर्डर फ्रंट चीन के अच्छे दोस्त नेपाल से भी खुल सकता है। यानी भारतीय सेनाओं को 3 तरफ से मोर्चा झेलना पड़ेगा। दरअसल वो इस लेख के जरिए ना केवल भारत को धमकी दे रहे हैं, बल्कि भारतीयों को दहशत में लाना चाहते हैं।

आखिर इतना परेशान क्यों है चीन? इस परेशानी की वजह उनका दूसरा लेख खुलासा करता है, जिसमें बताया गया है कि कैसे चीन के प्रोडक्ट्स का बैन करने का आव्हान RSS के सहयोगी संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने दिया है और ऐसा करके वो गलत कर रहे हैं।

इस लेख को पढ़कर आपको अंदाजा लगेगा कि RSS से कितना परेशान रहता है चीन, ना केवल उसको अंदाजा है स्वदेशी जागरण मंच के बहिष्कार के आव्हान से कितना फर्क पड़ेगा बल्कि वो भारत में कोरोना के चलते मुश्किल में आई अर्थव्यवस्था, गिरता निर्यात आदि का हवाला देकर भारत को समझाने की कोशिश कर रहा है कि बॉयकॉट का कॉल गलत है। चीन पाकिस्तान वाले लेख में वो बीजेपी के लोगों को ये लिखकर भी डरा रहा है कि अगर तीन तरफ से मोर्चा खुला तो हिंदू राष्ट्रवादी इसे बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे। भारत को हार मिली तो मोदी को कुर्सी से उतार फेंकेंगे। आप चीन की फ्रस्ट्रेशन का अंदाजा लगा सकते हैं।

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चीन को अपनी ताकत, पाकिस्तान और नेपाल पर इतना भरोसा है फिर भी दुनियां को ये बताने को तैयार नहीं है कि कितने चीनी सैनिकों की मौत हुई

वो लचर तर्क दे रहा है कि लोग एक दूसरे की मौतों की तुलना करेंगे, और कल को भारत के राष्ट्रवादियों को पता लगा कि उनके सैनिक ज्यादा मरे हैं तो मोदी के लिए मुश्किल कर देंगे। ये भी जान लीजिए कि अभी तक चीन ने ना भारतीय एजेंसियों की 43 चीनियों के मरने की खबर का खंडन किया है और ना ही अमेरिकी एजेंसियों की 35 सैनिकों के मरने की खबर का।

लेकिन आप ये जान लीजिए कि चीन को स्वदेशी जागरण मंच की ताकत का बखूबी पता है, वो ये जानता है कि गंभीरता से इसे माना गया तो चीन की कंपनियों के लिए मुश्किल हो जाएगी और तमाम चीन की कम्युनिस्ट अधिकारियों की कंपनियों का भारी नुकसान हो सकता है। पहले से ही कई कंपनियां वहां से भारत आने की तैयारी कर रही हैं, वो दोहरा झटका नहीं झेल पाएगा, ऐसे में उसने समझाने के साथ साध नेपाल, पाकिस्तान की भी धमकी देना शुरू कर दी है। वो भूल चुका है कि भारत भी चीन को ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका की मदद से चीन के सपनों को धूल धूसरित कर सकता है। उस लडा़ई में वो भारत के सैनिकों का हौसला पहले ही देख चुका है।