आज बाबा रामदेव ने कोरोना की दवा लांच करके देश ही नहीं दुनियां भर में तहलका मचा दिया। किसी को यकीन ही नहीं हो पा रहा था कि जब WHO वैक्सीन के लिए 1 साल की बजाय ढाई साल की बात कर रहा है, कोई भी ब़ड़ी मेडिसिन कंपनी अभी तक इसका इलाज नहीं ढूंढ पाई है, बाबा रामदेव ने क्या जादू कर लिया कि कोरोनिल नाम की दवाई बना ली। अब केन्द्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने फौरन इस दवा के प्रचार पर रोक लगा दी, इस दवा से जुड़ी सारी जानकारियां उत्तराखंड सरकार और पतंजलि आयुर्वेद से मांगी हैं, वो जांचेंगे कि इतना बड़ा दावा करने से पहले सारे नियमों का पालन हुआ भी है कि नहीं।

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आयुष मंत्रालय ने ये स्टेटमेंट जारी किया है, जिसमें ना केवल इस रोक के बारे में जानकारी दी गई है बल्कि बताया गया है कि इस आयुर्वेदिक दवाइयां किस नियम के तहत बनाई जाती हैं, प्रचारित की जाती हैं।

पतंजलि की तरफ से आज ये भी दावा किया गया था कि NIMS जयपुर के साथ एक ट्रायल स्टडी भी की गई थी, जिसमें करीब 100 मरीजों पर ट्रायल किए गए थे। 69 फीसदी मरीज 3 दिन के अंदर और 100 फीसदी मरीज 7 दिन के अंदर सही हो गए थे। मंत्रालय ने उसका सैम्पल साइज, हॉस्पिटल का नाम और उस स्टडी को पास करने वाले इथिक्स पैनल की भी जानकारी मांगी है। साथ में इस दवा का कम्पोजीशन भी मांगा है यानी दवा किन किन उत्पादों से मिलकर बनी है

यानी ये साफ है कि मोदी सरकार भी बाबा रामदेव के इतने बड़े दावे से परेशान हो गई है और वो चाहती है कि अपने स्तर पर इतने बड़े दावे की जांच करवा ले। यदि बाबा के दावे में दम हुआ तो सरकार पूरे दम खम के साथ बाबा के साथ खड़ी होगी, और अगर कोई कमी पाई जाती हैं, तो शायद ये दवा बाजार में बिकने आ ही ना पाए। सो घनी मुश्किल है, बाबा और मोदी सरकार दोनों एक दूसरे के विचारों के समर्थक होने के बावजूद कम से कम इस वक्त तो एक दूसरे के आमने सामने खड़े हो गए हैं।