अदानी ग्रुप के मुखिया गौतम अडानी के लिए दोतरफा मुश्किल होती है, एक तरफ जिस देश में वो कंपनियां खड़ी कर रहे हैं, वहां की कंपनियां उनके खिलाफ प्रदर्शन प्रायोजित करती हैं, दूसरी तरफ मोदी विरोधी नेता उनको कभी भी निशाने पर ले लेते हैं। ताजा मामला चीन विवाद से जुड़ा है, जैसे ही चीनी प्रोडक्ट्स के बहिष्कार का मुद्दा उठा, एआईएमआईएम के अध्यक्ष अससुद्दीन ओबेसी ने फौरन अदानी पर सवाल उठा दिया और पूछ डाला कि ये कैसी देशभक्ति है?

इस खबर के लिंक को आप खोलेंगे तो पाएंगे कि ये 3 साल पुरानी खबर है, जिसके मुताबिक चीनी कंपनी ईस्ट होप ग्रुप अदानी की कंपनी में 300 मिलियन डॉलर का निवेश करेगी। इसी पुरानी खबर को लेकर ओवैसी समेत तमाम लोगों ने चीन विरोध के माहौल में अदानी को घेरना शुरू कर दिया। लेकिन अदानी ग्रुप लगातार इस तरह की खबरों को लेकर परेशान हो गया

जाहिर है अदानी ग्रुप ने साफ साफ अदानी का नाम नहीं लिखा, लेकिन उसने स्पष्ट कर दिया है कि वो डील कैंसल हो गई थी। दूसरे वो डील तब हुई थी, जब चीन से भारत के इतने बुरे रिश्ते नहीं थे। ऐसे में अदानी को घेरना वाकई में गलत है, ऐसे में मोदी के विरोधी चीन विरोध के नाम पर अदानी को भी घेर रहे हैं। लेकिन सच ये भी है कि अदानी कितनी भी सफाई दे ले, ओवैसी जैसे लोग अपनी ट्वीट को ना डिलीट करने वाले हैं और ना खेद जताने वाले हैं।